Wednesday, November 16, 2022

Modern Philippines Archipelago (आधुनिक फिलीपीन द्वीपसमूह )

 भो लिक परिवेशः प्रशान्त महासागर में स्थित फिलीपीन तीन हजार स ऊपर द्वीपों का एक समूह है। यूजोना और मिन्दानाओं इनमें सबसे बड़े हैं। यहाँ की है। जातीय दृष्टि से यहां के लोग मलाया के लोगो से है आबादी को लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या रोमन "कैथोलिको की संख्या पांच प्रतिशत है। यहां कोई 27 भाषाएं प्रचलित है हमलोग और इलोकानो मुख्य हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमिः फिलीपीन के प्राचीन इतिहास की कोई विशेष जानकारी नहीं है 15वीं सदी में यहां इस्लाम धर्म का तेजी से विस्तार हुआ। आधुनिक काल में यहाँ सर्वप्रथम पुर्तगालियों का प्रवेश हुआ। पुर्तगाली यद्यपि यहाँ कार के उद्देश्य से आये थे, पर उन्होंने राजनीतिक प्रभाव स्थापित करने का भी प्रकार किया लेकिन इस उद्देश्य की प्राप्ति में उन्हें विशेष सफलता नहीं मिली 1521 = प्रद्ध फर्डिनेण्ड मैगलन फिलीपीन पहुंचा। इसके साथ है का लोगों में फिलीपीन पर अपना आधिपत्य स्थापित करने का प्रयास किया, स्थानीय लोगों के साथ उन्हें युद्ध करने पड़े जिसमें मैगलन मारा गया। 1527 = 1542 के बीच दो बार स्पेन का फिलीपीन के ऊपर आक्रमण हुआ। इस क्रम में पुर्तगालियों के साथ भी युद्ध करना पड़ा। 1564 में फिर से के कारन ने फिलीपीन के साथ युद्ध किया । स्पेनी बेड़े ने केबू द्वीप पर बर लिया और मनीला को अपनी राजधानी बनाया। इसके बाद धीरे-धीरे फिलीपीन द्वीप समूहों पर उनका अधिकार हो गया। स्पेन ने बलपूर्वक फिलीपीन में ईसाई धर्म का प्रचार किया तर यहा के लोगों को पर सभ्यता संस्कृति के रंग में रंगने की कोशिश की। आज फिलीपीन में ईसाई धर्मावलम्बियों की संख्या लगभग 80 प्रतिशत है। केवल दक्षिण फिलीपीन इस्लाम प्रधान क्षेत्र बना रहा। परिचमी सभ्यता अपना लेने के कारण यहां के लोगों की सभ्यता का स्तर अपेक्षाकृत काफी ऊंचा था। स्पेनी शासन का स्वरूपः स्पेन ने फिलीपीन का पश्चिमीकरण शुरू किया। लोग पश्चिमी सभ्यता-संस्कृति के रंग में रंगने लगे और जीवन के सभी पहलुओं पर पश्चिमी व्यवस्थाएं प्रभावशाली हो गयीं। बड़ी संख्या में गिरिजाघर बनाये गये और ईसाई धर्म प्रधान स्कूल खोले गये। स्पेनी शासन के अन्तर्गत फिलीपीन के साधनों और जनता का भरपूर शोषण किया गया। पर आर्थिक दृष्टि से प्रगति बहुत धीमी रही। कृषि के तरीके पुराने रहे। व्यापार पर अत्यधिक प्रतिबंधों के कारण उसके विकास में बाधा उत्पन्न हुई। स्पती शासन का स्वरूप पूर्णतः सामन्तवादी था। देश की समस्त भूमि पर सरकार का नियंत्रण था। प्रशासन का आधार 'एनकौमिएन्दा' प्रणाली थी। जब यह प्रणाली असफल हा गयी तो स्थानीय कार्यों का नियंत्रण फ्रायर्स (नियमित पादरी के हाथों में दे दी गयी। अतः फिलीपीन में ईसाई धर्म का तेजी से प्रचार हुआ परन्तु दश में राजनीतिक जड़ता को स्थिति उत्पन्न हो गयी। स्पेनी शासन का विरोध: प्रारम्भ से ही फिलीपीन का लोगों ने रपनी प्रभुत्व का विरोध किया। विद्रोह का आधारभूत कारण रानी शासन का भेदभावपूर्ण होना था। विदेशी पादरी एवं देशों पादरियों के बीच भी निरंतर तनाव रहता था एवं शिक्षा के विकास के कारण एक मध्यम वर्ग उदित हुआ जिसने राष्ट्रीय चेतना के विकास में योगदान दिया। प्रारम्भिक विद्रोहों की असफलता का मुख्य कारण राष्ट्रीय भावना का अभाव था परन्तु स्पेन के शासन में राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास हुआ। इस दिशा में 1868 का स्पनी क्रान्ति और गणराज्य की स्थापना में भी योगदान दिया। एक उदारे गवर्नर जनरल ना तर (1868-70) ने फिलीपीन में मुक्त विचारधारा को उत्साहित किया तथा अखबारों एवं अन्य राजनीतिक रचनाओं से प्रतिबन्ध हटा लिया। इसी भात में महान् लेखक जोस रिजाल ने कई रचनाएँ की एवं देश में स्वाधीनता की भावना का प्रचार किया। लेकिन शीघ्र ही स्पेन में गणराज्य का अन्त हो गया एवं प्रतिक्रियावादी राज्य कायम हो गया। (1872) में फिलीपीन में पुनः एक विद्रोह हुआ जिसे क्रूरतापूर्वक दबा दिया गया एवं अनेकों निर्दोष व्यक्ति मौत के घाट उतार दिये गये। लेकिन आन्दोलन बढ़ता ही गया तथा 1892 ई. में आन्द्र बॉनिफेसिओं एवं एमिलियां अबिनाल्दी से एक गुप्त संगठन संगठित किया जिसका उद्देश्य देश में क्रांति लाना था। अगस्त 1896 में इस दल के नेतृत्व ने देशव्यापी विद्राह शुरू हो गया। लेकिन इसका दमन किया गया एवं रिजाल को गोली मार दी गई। अतः क्रांतिकारियों ने मार्च (1897 में अलग- गणतांत्रिक सरकार का संगठन कर लिया एवं अबिनाल्दो को इसका अध्यक्ष निर्वाचित किया। अब स्पेन के शासकों ने शांति वार्ता चलाई और दिसम्बर 1897 में एक समझौते द्वारा क्रांतिकारियों के आन्दोलन बन्द करने का निश्चय किया एवं अग्विनाल्दो देश छोड़कर हांगकांग चला गया। लेकिन अशान्ति बनी रही और फरवरी 1898 में लुजोन में एक नई क्रांतिकारी सरकार का संगठन किया जिसका अध्यक्ष फ्रांसिस्को माबुलस था। इसी अशांत वातावरण में संयुक्त राज्य अमेरिका ने युद्ध में हस्तक्षेप किया एवं फिलीपीन से स्पेन का आधिपत्य खत्म हो गया। फिलीपीन पर अमेरीकी प्रभुत्व की स्थापनाः 19वीं सदी के अन्तिम चरण में अमेरिका में प्रसारवाद की प्रवृत्तियां उजागर हो रही थी। अमेरीकी पूंजीपति अपने मालों के लिए बाजार चाहते थे और उनके लिए पहला क्षेत्र दक्षिणी अमेरिका था। इस क्षेत्र के अनेकों राज्य स्पेन के कब्जे में थे अतः संयुक्त राज्य अमेरिका से संघर्ष अनिवार्य था। प्रथमत: क्यूबा में 1895 में स्पेन के विरुद्ध विद्रोह हुआ जिसका काफी क्रूरता से दमन किया गया। इसकी प्रतिक्रिया संयुक्त राज्य में हुई और वहां स्पेन के विरुद्ध युद्ध का वातावरण तैयार हो गया। उसी समय एक अमेरीकी जहाज क्यूबा तट पर डुबा दिया गया अतः अमेरिका ने युद्ध की घोषणा कर दी और स्पेन को मुंह की खानी पड़ी। अप्रैल 1898 में अमेरीकी जहाजी बेड़े ने स्पेनी जंगी बेड़े को नष्ट कर दिया एवं मनीला पहुंच गया। अब अग्विनाल्दो ने 24 मई, 1898 को एक गणराज्य की घोषणा कर दी। अमेरीकी जहाजी बेड़े ने फिलीपीन पर कब्जा कर लिया और स्पेनी शासन का अंत कर दिया। अतः अग्विनाल्दो ने भी समर्पण कर दिया। 1899 ई. में स्पेन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पेरिस की संधि हुई जिसके अनुसार फिलीपीन प्रेटोरिको एवं ग्वाम पर अमेरीकी प्रभुसत्ता कायम हो गयी। इस तरह स्पेन के साम्राज्य का अंत हुआ और फिलीपीन पर अमेरीकी साम्राज्य कायम हो गया। - अमेरीको शासन का स्वरूपः फिलीपीन पर अमेरीकी प्रभुत्व की स्थापना उसकी प्रसारवादी नीति का प्रतिफल थी। इसका प्रमुख प्रणेता अमेरिका का भावी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट था। अमेरिका ने अपने समृद्ध व्यापार की रक्षा एवं विकास के उद्देश्य से फिलीपीन पर अधिकार किया था। अमेरिका के सामने मुख्य प्रश्न यह था की इस विजय का उपयोग किया जाए

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